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लघुकथाएँ - देश - डॉ प्रभात दुबे





नया व्यवसाय - डॉ प्रभात दुबे


प्रात: दस बजने को थे कि तभी एक युवक ने मन्दिरों की सीढियों पर बैठे भिखारियों की मन ही मन गिनती करते हुए मन्दिर में प्रवेश किया। उसने श्र्द्धा से ईश्वर को प्रणाम कर पाँच –पाँच सौ रुपयों की नई गड्डी में से दो नोट निकाल कर पुजारी को देते हुए कहा –‘महाराज इन रुपयों में से आठ सौ रुपये आप रख लीजिए और दौ सौ रुपयों के दस –दस वाले बीस नोट मुझे दे दीजिए।

पुजारी ने प्रसन्न होकर युवक को दस–दस के बीस नोट और काफी मात्रा में प्रसाद देते हुए पूछा –‘बेटे क्या आज तुम्हारा जन्म दिन है। ’
युवक ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए पुजारी से रुपये और प्रसाद लेते हुए कहा –‘नही महाराज मैं आज से और अभी से अपना नया व्यवसाय प्रारंभ कर रहा हॅू इसलिये ईश्वर और आपका आशीर्वाद लेने आया हॅू।

पुजारी अपना दाहिना हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में उठाकर कुछ कहने ही वाले थे कि तभी कुछ और भक्त पुजारी के सामने आ खड़े हुए। कुछ पलों बाद युवक ने मन्दिर के बाहर आकर बीस भिखारियों को दस–दस रुपये दान किये और चला गया।

पुजारी ने जब दूसरे दिन युवक द्वारा दिये गये पाँच–पाँच सौ रुपये के नोटो को बैक में जमा कराया, तो बताया गया कि वे दोनो नोट नकली है। अब पुजारी जेी समझ चुके थे कि युवक ने नकली नोटो का व्यवसाय प्रारंभ किया था और इसी के लिए उसने ईश्वर का और उनका आशीर्वाद माँगा था।

सम्पर्क-प्रभात दुबे,111 पुष्पाजली स्कूल के सामने,शक्तिनगर जबलपुर (म प्र)

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