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लघुकथाएँ - संचयन - ऋता शेखर ‘मधु’
भूल
बात उस समय की है जब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती थी| हम तीन छात्राओं के बीच एक-एक अंक को लेकर मारधाड़ मची रहती थी क्योंकि हम तीनों ही प्रथम स्थान पाने के लिए प्रयत्नशील रहते थे|
फ़ाइनल परीक्षा शुरु हो चुकी थी| उस दिन अंग्रेजी की परीक्षा थी| मेरे कमरे में मेरे जीवविज्ञान के शिक्षक गार्डिंग कर रहे थे| मेरा पेपर लगभग पूरा हो चुका था|प्रश्नपत्र में एक शब्द था ‘ऐट औल’, जिस पर वाक्य बनाना था|मुझे उसका अर्थ नहीं पता था| सिर्फ़ पाँच मिनट समय बच गया था| मैं दो अंक का वह वाक्य गँवाने के लिए तैयार नहीं थी| मैं ने सर से उसका अर्थ पूछा| वे यह बोलते हुए निकल गए कि ‘आई डोन्ट नो इंगलिश ऐट औल’| मैं ने हड़बड़ाहट में ‘ऐट औल’शब्द पर ध्यान नहीं दिया| मुझे लगा कि उन्होंने साफ़ ही मना कर दिया कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती| जब मैं घर आई तो मेरे पापा ने मुझसे परीक्षा के बारे में पूछा| मैंने सारी बात बताई|पापा ने वह वाक्य पूछा जो सर ने कहे थे| उसे सुन वे हँसने लगे और बताया कि सर ने तो मेरी मदद की थी| मैं ही नहीं समझ पाई थी| मैं अपनी बेवकूफ़ी पर मुस्कुरा उठी| दो अंक गँवाने की कसक लिए मैं सो गई| यह बात मुझे किसी की बात को धैर्यपूर्वक सुनने और समझने की शिक्षा दे गई| मैं आज भी सर को हर शिक्षक दिवस के दिन आदरपूर्वक याद करती हूँ|
 
 
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